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प्रवर्तन निदेशालय
वित्त मंत्रालय, राजस्‍व विभाग
संगठनात्‍मक ढांचा
प्रवर्तन निदेशालय का उद्भव।

1     प्रवर्तन निदेशालय की स्‍थापना जून 1960 में हुई। इससे पूर्व, 1956 से यह वित्त मंत्रालय, आर्थिक कार्य विभाग के अधीन एक ‘प्रवर्तन एकक’ था। फिलहाल, यह निदेशालय वित्त मंत्रालय, राजस्‍व विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन है। इसका मुख्‍यालय, नई दिल्‍ली में है, जहॉं प्रवर्तन निदेशक, दो विशेष प्रवर्तन निदेशक व अन्‍य अधिकारी कार्यरत हैं। निदेशालय के मुम्‍बई व अहमदाबाद क्षेत्रीय कार्यालयों के कार्य का नियंत्रण विशेष प्रवर्तन निदेशक (मुम्‍बई) करते हैं। प्रवर्तन निदेशालय के 10 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जिनके प्रमुख उप-निदेशक स्‍तर के अधिकारी हैं व 11 उप-क्षेत्रीय कार्यालय, जिनके प्रमुख सहायक निदेशक हैं।  ये कार्यालय निम्‍न स्‍थानों पर हैं:-    

क्षेत्रीय कार्यालय

अहमदाबाद, बंगलूरु, चेन्‍नई, चंडीगढ़, कोचीन, दिल्‍ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ  और मुम्‍बई।

क्षेत्रीय कार्यालय

अहमदाबाद, बंगलूरु, चेन्‍नई, चंडीगढ़, कोचीन, दिल्‍ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ  और मुम्‍बई।

2.    प्रवर्तन निदेशालय में भिन्‍न–भिन्‍न स्‍तर के 745 पद हैं, जिन पर भर्ती यू.पी.एस.सी./एस.एस.सी/पदोन्‍नति द्वारा की जाती है या जिनको प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरा जाता है। इन सभी 745 पदों का विवरण निम्‍न है:-
क्रम सं.

पदनाम/कैडर

पद-संख्‍या

1.

एक्‍ज्‍यूक्‍युटिव पद

319
2. अनुसचिवीय पद 214
3. विधिक पद 13
4. कम्‍प्‍यूटरा‍इजेशन पद 12
5. चालक व समूह ‘घ’ पद 187
योग 745
3.    विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम व धन शोधन निवारण अधिनियम से संबंधित उपरोक्‍त कार्यो के अलावा निदेशालय विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्‍करी निवारण अधिनियम (कोफेपोसा), 1974 के अंतर्गत आभ्‍यासिक अपराधियों को नजरबंद करने के मामलों में कार्यवाही करता है तथा सिफारिश करता है जिसके अन्‍तर्गत अन्‍य बातों के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा के संरक्षण तथा आवर्धन को हानि पहॅुचाने के कार्य करने वाले व्‍यक्ति को एक वर्ष की अवधि के लिए नजरबंद करने की व्‍य‍वस्‍‍था है। फेमा के अधीन भूमिका:
4.    प्रवर्तन निदेशालय, राजस्‍व विभाग, वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्य करता है और यह फेमा के उपबंधों को लागू करने के लिए अधिदेशित है। तथापि, विनिमय नियंत्रण से संबंधित नियम व‍ नीतियां बनाना वित्त मंत्रालय, आर्थिक कार्य विभाग व भारतीय रिजर्व बैंक का कार्य है।
5.    निदेशालय द्वारा फेमा-उपबंधों के संदिग्‍ध उल्‍लंघनों से संबंधित मामलों का पता लगाया जाता है व उनकी जांच की जाती है और इसके बाद न्‍यायनिर्णयन कार्यवाही की जाती है जिसमें इसके अंतर्गत निधियों को जब्‍त करने के आदेश देने के अलावा अपराधियों पर जुर्माना लगाया जाता है। पी. एम. एल. ए. के अधीन भूमिका:-
6.    धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पी एम एल ए) 1 जुलाई, 2005 से लागू हुआ। यह अधिनियम धनशोधन निवारण हेतु बनाया गया है और इसमें धनशोधन से प्राप्‍त अथवा अन्‍तर्ग्रस्‍त सम्‍पत्ति की कुर्की व जब्‍त करने का प्रावधान है। अपराधियों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है तथा उनके विरुद्ध आपराधिक अभियोग भी सम्‍बंधित न्‍यायालयों में चलाने का प्रावधान है।  
7.    तथापि, निदेशालय पी. एम. एल. ए. के अधीन कार्रवाई की शुरूआत तभी कर सकता है जबकि संबंधित एजेन्सियां अर्थात् पुलिस, सी बी आई, एन सी बी, डी आर आई द्वारा विनिर्दिष्‍ट अनुसूचित/प्रतिपादित अपराध किए जाने के मामले में पंजीकरण किया जा चुका हो।  
8.    विधिशास्‍त्र की भारतीय पद्वति के लिए पी. एम. एल. ए. एक नयी संकल्‍पना है। वस्‍तुत: अभी भी प्रारंम्भिक व विकसित होने की अवस्‍था में है। जहां प्रारंभ में भारतीय दंड संहिता के अधीन कुछेक अपराधों और 06 अन्‍य आपराधिक अधिनियमों को पी एम एल ए के अंतर्गत अनुसूचित अपराधों में शामिल किया गया था, हाल ही में, 1 जून 2009 से इस अधिनियम के संशोधित उपबंध लागू कर दिए गए हैं। तत्‍पश्‍चात्, 28 आपराधिक अधिनियमों के अधीन काफी बड़ी संख्‍या में अनुसूचित अपराध (लगभग 156) पी. एम. एल. ए. के अधीन अनुसूचित किए गए हैं
 
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